प्रेमानंद जी महाराज ने फूल और प्रसाद को पैरों से लगने के बाद क्या करें इसके बारे में क्या कहा चलिए पढ़ते है, ज्यादातर आपने देखा होगा कि मंदिर में जहां भक्तों की बहुत ही ज्यादा भीड़ होती है वहां पर प्रसाद हाथ से कैसे भी गिर ही जाते हैं या आप फूल चढ़ाने जा रहे हो धक्का मुक्की हो रही है तो कहीं ना कहीं फुल जमीन पर गिरी जाते हैं और वह स्वाभाविक सी बातें की भीड़ की वजह से आप उसे उठा नहीं पाते हो तो वह किसी न किसी के पैर के नीचे आती है या किसी और का गिरा है तो आपके पैर के नीचे आ रही है तो इसमें हमें क्या करना चाहिए .
अगर पैर से फूल या प्रसाद लग जाए तो क्या करे
अगर आप मंदिर जा रहे हैं तो आपके पैर से अगर फूल या प्रसाद लग जाए तो आप उसे उठाकर अपने माथे से लगाए और उसे नमस्कार करें और उसे अपने पॉकेट में रख दें या कहीं उचित स्थान पर उसको रख दें या कहीं अगर आप उसको ले जाकर किसी गंगा नदी में बहा देते हैं तो वह आपको पुण्य की भाभी करेगी उससे आपको कोई भी नुकसान नहीं होगा ।

अगर कोई फूल प्रभु के श्री चरण में पड़ा हो उसके बाद आपके पैर से लग जाए तो क्या करें
तो सबसे पहले आप उस फूल को अपने आंखों से नमस्कार करें अगर आप उसे उठा पाते हैं तो उसे उठा ले और अगर नहीं उठा पाते हैं तो हृदय से प्रणाम करें और प्रभु का नाम लेकर आप आगे बढ़ जाइए वह आपके प्रति अच्छा ही होगा क्योंकि वह फूल प्रभु के श्री चरणों का है ।
प्रेमानंद जी ने बताया कि प्रसाद या फूल कैसे लेते हैं
गुरु जी ने कहा कि आप अगर फूल को लेते हैं तो अपने आंचल में ले और पुरुष गमछी रखें एवं अंगोछा रखे हैं उसमें फूल ले, हाथ में लेने से ऐसा होता है कि उसको गिरने की संभावना ज्यादा होती है तो ऐसा करने से बचे, आप फूल को किसी झोले में ले, ऐसा करें कि वह फूल जमीन पर ना गिरे ।
निष्कर्ष
मंदिर में फूल और प्रसाद का अगर एक भी कण आपके पैर के नीचे आ जाता है तो उसके लिए आपके भाव में कष्ट होना चाहिए अगर आप उसे उठा सकते हैं तो उसे उठा ले नहीं उठा सकते हैं तो अपनी आंखों से और हृदय से उसे नमस्कार करें प्रभु का नाम ले इससे आपको फायदा ही होगा क्योंकि प्रभु आपकी करुणा को देखते हैं आपको कष्ट को देखते हैं और नाम जप करते हुए आगे बढ़ सकते हैं।

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