राधा अष्टमी व्रत आम व्रत के जैसा नहीं है प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि इस दिन आप प्रेम प्राप्ति के लिए व्रत कर सकते हैं जैसे और व्रत होते हैं उसमे अलग-अलग रूल नियम बने हुए हैं क्या खाना है क्या नहीं खाना है राधा अष्टमी व्रत आपके मन के चिंतन के लिए है आप उस दिन कितना चिंतन करते हैं राधा जी का किशोरी जी का वह असली व्रत है
Radha Ashtami 2025 Date and Time ( Sun, 31 Aug, 2025 )
राधा जी का जन्म कितने बजे हुआ था ?
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि राधा जी का जन्म प्रातः 4:00 बजे हुआ था । जैसे कृष्ण जी का जन्म 12:00 बजे हुआ था तो उस समय लोग उनका भोग लगाकर जन्मदिन की बधाइयां देकर जो भोग लगता है उसी का सेवन करते हैं इसी प्रकार प्रातकाल 4:00 बजे श्री जी का जन्म होता है तो आप उन्हें चामृत सामान को भोग लगाकर अपने पा सकते हैं तो गुरु जी का मानना है कि आप उनके लिए चिंतन करें जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके अपने मन में राधा राधा राधा नाम जपते रहें।
राधाष्टमी अलग क्यों है
राधा अष्टमी सबसे अलग इसलिए है कि इस दिन कोई रूल और रेगुलेशन नहीं है आप अपने हिसाब से किशोरी जी का नाम जप करते हुए व्रत रह सकते हैं और फल फलाहार खा सकते हैं ऐसा नहीं है कि आपको एकादशी के जैसा रूल फॉलो करना है इसमें क्या होता है 4:00 बजे श्री जी का जन्म हो जाता है सुबह तो आप उसके बाद अमृत का भोग लगाइए और प्रसाद ले लीजिए क्योंकि जन्म हो चुका है सुबह का तो आप ये कर सकते है जैसा श्री कृष्ण जी के लिए फॉलो करते हैं उसी प्रकार इनको भी फॉलो करना है ।
राधा अष्टमी का व्रत क्यों रहना चाहिए
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि राधा अष्टमी का व्रत मात्र प्रेम प्राप्ति के लिए रहना चाहिए ना कि किसी बाहरी विचार या इच्छाएं के लिए क्योंकि यह किशोरी जी का जन्मदिन है किशोरी जी का नाम जाप करिए लाडली जी का नाम जप कीजिए और राधा राधा दिन भर कीजिए इससे आपके प्रति किशोरी जी प्रसन्न होंगी और आपको प्रेम की प्राप्ति होगी आपको भगवत प्राप्ति होगी और आप सदैव खुश रहेंगे ।
निष्कर्ष
भगवत प्राप्ति के लिए और प्रेम प्राप्ति के लिए सबसे अच्छा दिन हो सकता है आपको राधा अष्टमी क्योंकि इस दिन स्वयं किशोरी जी का जन्म होता है और जिनकी ऊपर किशोरी जी प्रसन्न हो गई उनके ऊपर श्री कृष्ण जी स्वयं प्रसन्न हो जाएंगे क्योंकि श्री कृष्ण जी राधा जी को फॉलो करते हैं तो आप कोशिश कीजिए कि राधा जी को प्रसन्न कर लें प्रभु स्वयं प्रसन्न हो जाएंगे ।

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